टोल बढ़ा, लेकिन सुरक्षा नहीं—मारकुंडी घाटी में खतरा बरकरार

सोनभद्र (संवाददाता इस्तियाक अहमद)।जनपद के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण आवागमन मार्गों में शामिल मारकुंडी घाटी आज भी लापरवाही की मार झेल रही है। हैरानी की बात यह है कि लगभग एक वर्ष पूर्व बरसात के दौरान पहाड़ी से गिरे भारी-भरकम पत्थर और मलबा अब तक सड़क के किनारे और कई स्थानों पर मार्ग के बीचों-बीच जमे हुए हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से इसे हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।घाटी से गुजरने वाले लोग रोजाना इस खतरनाक मंजर के गवाह बनते हैं। सड़क पर फैले बड़े-बड़े पत्थरों ने मार्ग को संकरा कर दिया है, जिससे खासकर भारी वाहनों के आवागमन के दौरान हर पल दुर्घटना का खतरा मंडराता रहता है। कई बार वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरना पड़ता है।स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है, जब सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती दिखती है। मलबे के ऊपर छोटे-छोटे परावर्तक (रेडियम) चिन्ह लगाकर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। जबकि यह अस्थायी उपाय किसी भी बड़े हादसे को रोकने में पूरी तरह नाकाफी साबित हो सकता है।
मारकुंडी घाटी का यह मार्ग न केवल आम जनता के लिए, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए भी बेहद अहम है। 
इसके बावजूद इतनी गंभीर समस्या का लंबे समय तक जस का तस बने रहना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।इसी बीच एक और बड़ा विरोधाभास सामने आता है। घाटी से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित लोढ़ी शुल्क नाका पर हर साल टोल शुल्क में बढ़ोतरी की जा रही है, लेकिन सड़क की सुरक्षा और रखरखाव की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। ऐसे में जनता सवाल उठा रही है कि आखिर वसूले जा रहे शुल्क का उपयोग कहां हो रहा है?स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से सड़क पर पड़े मलबे को हटाकर मार्ग को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले ही इस गंभीर समस्या का समाधान हो सके। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने