ओबरा (सोनभद्र)।ओबरा गजराज नगर से डाला को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों गंभीर यातायात संकट से जूझ रहा है। मार्ग पर स्थित डाला रेलवे फाटक अब केवल एक फाटक नहीं, बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की परेशानी का केंद्र बन चुका है।वहीं दूसरी तरफ भलुआ टोला रेलवे फाटक भी स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों के लिए समस्या बना हुआ है।यह रेल मार्ग अत्यंत व्यस्त रूट माना जाता है, जहां दिन-रात पैसेंजर ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों और एक्सप्रेस ट्रेनों का लगातार संचालन होता रहता है। इसका सीधा असर यह है कि दिन में कई-कई बार फाटक बंद हो जाता है और दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कभी-कभी उन्हें 20 से 30 मिनट तक फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता है। दोपहिया, चारपहिया, ऑटो, ट्रक और बसें सभी एक ही जगह फंसी रहती हैं, जिससे पूरे इलाके में जाम की स्थिति बन जाती है। खास बात यह है कि यह मार्ग केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को जिला मुख्यालय से जोड़ने का प्रमुख रास्ता भी है।
सबसे चिंताजनक स्थिति तब पैदा होती है जब आपातकालीन वाहन, विशेषकर एंबुलेंस, भी जाम में फंस जाते हैं। कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने की आशंका बनी रहती है। लोगों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज के साथ अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?हाल के महीनों में एक और बड़ी समस्या सामने आई है। पहले यह रेलवे फाटक ऑटो कंट्रोलिंग सिस्टम से संचालित होता था, जिससे ट्रेन गुजरते ही कुछ ही मिनटों में फाटक स्वतः खुल जाता था। लेकिन अब स्थिति यह है कि ट्रेन गुजरने के बाद भी फाटक को मैन्युअल रूप से एक-एक साइड का लॉक खोलकर संचालित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है, जिससे पहले से लगे जाम की अवधि और बढ़ जाती है।गर्मी का मौसम नजदीक है और ऐसे में राहगीरों को खुले आसमान के नीचे लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है। तेज धूप में बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए यह इंतजार किसी परीक्षा से कम नहीं होता। कई लोग बीमार भी पड़ रहे हैं, लेकिन मजबूरी में उन्हें फाटक खुलने तक वहीं रुकना पड़ता है।स्थानीय व्यापारियों का भी कहना है कि जाम की वजह से बाजार प्रभावित हो रहा है। ग्राहक समय पर दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और माल ढुलाई में भी परेशानी आ रही है। इससे आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और रेलवे विभाग से पुरजोर मांग की है कि डाला व भलुआ टोला रेलवे फाटक पर जल्द से जल्द वैकल्पिक मार्ग, अंडरपास या ओवरब्रिज का निर्माण कराया जाए। साथ ही फाटक की स्वचालित प्रणाली को तत्काल दुरुस्त किया जाए, ताकि ट्रेन गुजरते ही फाटक समय पर खुल सके। लोगों का साफ कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में हालात और भी भयावह हो सकती हैं।
