योगी सरकार की संवेदनशील नीति—7700+ आश्रय स्थल, गोपालकों को सीधा लाभ, सोनभद्र बना उदाहरण

संवाददाता इस्तियाक अहमद



उत्तर प्रदेश में ‘गौ सेवा’ अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सुशासन का मजबूत आधार बन चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण को मानवीय, सामाजिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाते हुए बड़े स्तर पर कार्य किया है।प्रदेश सरकार की पहल से आज उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए ₹50 प्रतिदिन प्रति पशु की सहायता सीधे प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत गोपालकों को डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभ मिल रहा है, जिससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी हो रही है।राज्य में वर्तमान में 7,700 से अधिक गो-आश्रय स्थल संचालित हो रहे हैं, जिनमें 16 लाख से अधिक गोवंश को सुरक्षित आवास, पौष्टिक आहार, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं। इससे न सिर्फ पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई है।

पारदर्शिता और निगरानी को और सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने 5,446 गौशालाओं में 7,592 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए हैं, जो 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं।‘मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत अब तक 1.67 लाख से अधिक गोवंश जिम्मेदार गोपालकों को सौंपे जा चुके हैं। यह योजना जनभागीदारी का बेहतरीन उदाहरण बन रही है।जनपद सोनभद्र में भी गौ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। यहां 8 गौ-आश्रय स्थल में 2814 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि 368 गोपालकों ने 1057 गोवंश को अपनाकर समाज में सकारात्मक संदेश दिया है।प्रदेश सरकार गोवध निवारण अधिनियम 1955 के तहत सख्ती से नियम लागू कर रही है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है।सरकार ने भ्रामक प्रचार फैलाने वाले तत्वों पर भी सख्त नजर रखी है। अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा रहा है।

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