एनएसएस के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञों ने दिए स्वस्थ भविष्य के मंत्र

संवाददाता सौरभ पांडे 



ओबरा, सोनभद्र (11 अप्रैल 2026)।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा में आज पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत “मातृ एवं शिशु पोषण और मस्तिष्क विकास के लिए प्रारम्भिक प्रोत्साहन” विषय पर एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की चारों इकाइयों के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और स्वयंसेवकों ने भाग लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्राचार्य प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार, आयरन-फोलिक एसिड की नियमित खुराक और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच माँ और शिशु दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि शिशु के जीवन के पहले 1000 दिन उसके शारीरिक और मस्तिष्क विकास के लिए सबसे अहम होते हैं।कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सचिन कुमार ने संतुलित आहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का सही संतुलन बच्चों की सीखने की क्षमता और स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। उन्होंने माताओं को दाल, हरी सब्जियां, दूध और अंडा जैसे सस्ते व स्थानीय खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने की सलाह दी।वहीं डॉ. आलोक यादव ने प्रारम्भिक प्रोत्साहन की अहमियत बताते हुए कहा कि बच्चों से संवाद, खेल-खेल में शिक्षा, चित्रों और कहानियों के माध्यम से सीखने का वातावरण उनके मस्तिष्क विकास को तेज करता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता का स्नेह और संवाद बच्चों के सर्वांगीण विकास की नींव है।कार्यक्रम के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कुपोषण के दुष्परिणाम और उसके समाधान पर प्रभावी संदेश दिया, जिसने उपस्थित लोगों को जागरूक किया।अंत में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संघमित्रा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इस अवसर पर डॉ. अंजलि मिश्रा सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक, कार्यालय अधीक्षक राजेश्वर रंजन, धर्मेंद्र कुमार, महेश पांडेय, सरफुद्दीन, मनीष, अरुण सहित अनेक कर्मचारी एवं भारी संख्या में एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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