दो राज्यों के अधिकारियों के बीच बना मजबूत समन्वय, जन-धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
मिर्जापुर/सोनभद्र। आगामी वर्षाकाल में बाढ़ की संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने संयुक्त रूप से बड़ी रणनीति तैयार की है। विन्ध्याचल मण्डल और रीवा मण्डल के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित अंतर्राज्यीय बाढ़ नियंत्रण समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका सीधा लाभ दोनों राज्यों के सीमावर्ती जिलों के लाखों लोगों को मिलेगा।अष्टभुजा निरीक्षण गृह, मिर्जापुर में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक की सह-अध्यक्षता विन्ध्याचल मण्डल के मण्डलायुक्त राजेश प्रकाश एवं रीवा मण्डल के मण्डलायुक्त बी.एस. जामोद ने की। बैठक में सोनभद्र, मिर्जापुर, रीवा एवं मऊगंज जनपदों के प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया तथा बाढ़ राहत एवं बचाव तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया कि मेजा एवं अदवा बांध से 80 हजार क्यूसेक से अधिक पानी नहीं छोड़ा जाएगा। साथ ही यदि जलाशयों से पानी छोड़ा जाना आवश्यक होगा तो संबंधित जनपदों और राज्यों को पहले से सूचना उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े सोनभद्र के जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि जनपद में बाढ़ नियंत्रण, राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है और बांधों से पानी छोड़े जाने से पूर्व संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराई जाएगी।बैठक में अधिकारियों ने कंट्रोल रूम, वायरलेस संचार प्रणाली तथा व्हाट्सएप ग्रुप को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने पर विशेष जोर दिया। यह भी तय किया गया कि दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकारी लगातार संपर्क में रहेंगे ताकि किसी भी संभावित बाढ़ संकट का त्वरित और प्रभावी समाधान किया जा सके।अधिकारियों ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में अंतर्राज्यीय समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि इस बार तकनीक और सूचना तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है, जिससे लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।






.jpeg)
0 टिप्पणियाँ