भारत लाइव टीवी।संवाददाता एम. आरिफ़ खान
बदायूं। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने और बच्चों के अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से जिला पंचायत सभागार कक्ष में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया तथा उपस्थित लोगों को बाल विवाह न करने एवं न होने देने की शपथ दिलाई गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नंद किशोर पाठक ने सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों का सुरक्षित एवं शिक्षित भविष्य ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में काउंसलर चेतना ने कहा कि जिन बच्चों का किसी भी प्रकार से शोषण होता है, उनकी पहचान कर उनके परिवारों से संपर्क किया जाता है तथा काउंसलिंग के माध्यम से बच्चों को सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।संस्था के समन्वयक देवेंद्र पाल ने बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा एवं अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बना देता है। इसे रोकने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही इस सामाजिक बुराई को खत्म करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों को बाल विवाह न करने और न होने देने की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर बाल विवाह से प्रभावित सर्वाइवरों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिससे उपस्थित लोगों को इस कुप्रथा के दुष्परिणामों की गहरी जानकारी मिली।कार्यक्रम के समापन पर संस्था की सचिव मीना सिंह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं ग्राम पंचायतों से आए प्रतिनिधियों तथा बाल विवाह सर्वाइवरों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से ही बाल विवाह मुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है।इस अवसर पर अनुपम, दुर्गा, रूबी, सत्येंद्र सिंह, अनिल कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में बाल अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह उन्मूलन और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों पर विशेष जोर दिया गया।








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