लिखित मांग के बावजूद नहीं भेजे गए सफाईकर्मी, नगर पंचायत की कार्यशैली पर उठे सवाल
ओबरा (सोनभद्र)। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन ओबरा नगर पंचायत में सरकारी दावों की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहां खिलाड़ियों को खेल मैदान उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें खुद झाड़ू उठाकर स्टेडियम की सफाई करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।स्थानीय स्टेडियम में आयोजित होने वाले क्रिकेट टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने नगर पंचायत प्रशासन से केवल दो सफाई कर्मचारियों की मांग की थी। इसके लिए अधिशासी अधिकारी और नगर पंचायत अध्यक्षा को बाकायदा लिखित प्रार्थना पत्र भी सौंपा गया, लेकिन खिलाड़ियों का आरोप है कि उनकी मांग को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। न तो कोई सफाईकर्मी भेजा गया और न ही खेल आयोजन को लेकर कोई सहयोग प्रदान किया गया।सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हाल ही में जिलाधिकारी ने खेल सुविधाओं के विकास को लेकर समीक्षा बैठक करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि खिलाड़ियों को बेहतर वातावरण, प्रशिक्षण और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बावजूद इसके ओबरा नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी जिलाधिकारी के निर्देशों को ठेंगा दिखाते नजर आए।नगर पंचायत की उदासीनता से निराश खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी। उन्होंने स्वयं झाड़ू, फावड़ा और अन्य सफाई उपकरण उठाए और पूरे स्टेडियम की सफाई का जिम्मा संभाल लिया। कड़ी धूप में घंटों तक श्रमदान कर खिलाड़ियों ने मैदान को खेलने योग्य बनाया। यह दृश्य जहां युवाओं की खेल भावना और समर्पण को दर्शाता है, वहीं नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी नगर पंचायत होने का दावा करने वाली ओबरा नगर पंचायत यदि खिलाड़ियों को दो सफाईकर्मी तक उपलब्ध नहीं करा सकती, तो खेलों को बढ़ावा देने के दावे कितने खोखले हैं, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
खेल प्रेमियों और नागरिकों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि जिस स्टेडियम से भविष्य के खिलाड़ी तैयार होने चाहिए, वहां खिलाड़ियों को सफाई कर्मचारी की भूमिका निभानी पड़ रही है। यह स्थिति न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब करेगा? क्या खिलाड़ियों को उनकी बुनियादी सुविधाएं मिल पाएंगी? या फिर सरकारी योजनाएं और अधिकारियों के निर्देश केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?







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