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पंच सम्मेलन में वीबीजी राम जी योजना को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों को किया गया जागरूक


सोनभद्र, 14 अगस्त 2026।
ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका की बेहतर सुरक्षा प्रदान करने तथा ग्राम पंचायतों को विकास प्रक्रिया में और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों को “विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबीजी राम जी” योजना के प्रमुख प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई।


कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधिका पटेल, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, ब्लॉक प्रमुख म्योरपुर श्री मान सिंह गोंड़, वीबीजी राम जी अधिकारी श्री रविन्द्र वीर सिंह, ग्राम प्रधानों सहित बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

125 दिनों के रोजगार की गारंटी

सम्मेलन में बताया गया कि योजना के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का प्रावधान है। निर्धारित अवधि में काम की मांग के बावजूद रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की व्यवस्था होगी। वहीं मजदूरी भुगतान में देरी होने पर प्रत्येक विलंबित दिन के लिए मजदूरी के साथ मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है।

ग्राम सभा तय करेगी विकास की प्राथमिकताएं

नई व्यवस्था में ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक मजबूत किया गया है। ग्राम पंचायतें ग्रामीणों की सहभागिता से “विकसित ग्राम पंचायत योजना” तैयार करेंगी। इसमें गांव की स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। जल सुरक्षा एवं संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक आपदाओं से निपटने वाले कार्यों पर विशेष जोर रहेगा।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधिका पटेल ने कहा कि ग्रामीण भारत के समग्र विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिनिधियों से योजना की जानकारी प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाने और ग्राम सभा के माध्यम से स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों का चयन कराने का आह्वान किया।

मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने कहा कि 125 दिनों की रोजगार गारंटी ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने तथा अधिक से अधिक ग्रामीणों को योजना से जोड़ने की अपील की।

कृषि कार्यों को ध्यान में रखकर 60 दिन कार्यविराम

योजना में बुवाई और कटाई जैसी प्रमुख कृषि गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए कुल 60 दिनों की अवधि निर्धारित किए जाने का प्रावधान है। इस अवधि में योजना के तहत कार्यों का संचालन नहीं होगा, जिससे कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता बनी रहे और खेती-किसानी प्रभावित न हो।

प्रशासनिक मद 6 से बढ़कर 9 प्रतिशत

योजना के प्रभावी संचालन के लिए प्रशासनिक मद की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किए जाने का प्रावधान है। इससे ग्राम रोजगार सहायकों, फील्ड असिस्टेंट और तकनीकी सहायकों की सेवाओं, क्षमता विकास एवं योजना संचालन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि मनरेगा के अंतर्गत वर्तमान में संचालित कार्य प्रभावित या बंद नहीं होंगे। मौजूदा कार्य पूर्व की भांति पूरे किए जाएंगे तथा नए प्रावधान लागू होने के बाद नियमानुसार नए कार्य शुरू किए जाएंगे।

पंच सम्मेलन के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों से योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार का आह्वान किया गया। ग्राम पंचायत भवनों, ग्राम सभा स्थलों, सरकारी कार्यालयों एवं सामुदायिक भवनों में पोस्टर-होर्डिंग लगाने और पैम्फलेट वितरण के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करने पर जोर दिया गया, ताकि प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को योजना का लाभ मिल सके।

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