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बुजुर्ग की पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप

 एक साल से न्याय की आस में भटक रहा पीड़ित, आत्मदाह की दी चेतावनी


शंकरगढ़, प्रयागराज
। तहसील बारा के नगर पंचायत शंकरगढ़ स्थित लाला पुरवा निवासी 65 वर्षीय रामसरखा तिवारी ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने और राजस्व विभाग की रिपोर्ट आने के बावजूद आज तक उनकी भूमि कब्जामुक्त नहीं कराई गई।

रामसरखा तिवारी के अनुसार उनकी भूमि पर कुछ लोगों ने नींव भरकर मकान का निर्माण कर लिया है। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने का प्रयास भी किया गया। इस संबंध में थाना शंकरगढ़ में मुकदमा भी दर्ज है। उनका कहना है कि भूमि तहसील बारा के राजस्व अभिलेखों में उनके नाम दर्ज है, इसके बावजूद कब्जा नहीं हटाया जा रहा है।पीड़ित ने बताया कि उन्होंने धारा-24 के तहत भूमि की पैमाइश के लिए वाद दायर किया था। तत्कालीन राजस्व निरीक्षक अभयराज यादव एवं राजस्व टीम द्वारा की गई पैमाइश में उनकी भूमि पर कब्जे की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई थी। हालांकि अंतिम पैमाइश का वाद अभी विचाराधीन है, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से निर्माण कार्य जारी है।

रामसरखा तिवारी का आरोप है कि उन्होंने 27 जून 2025, 1 जुलाई 2025, 18 जुलाई 2025, 19 अगस्त 2025 तथा 2 जुलाई 2026 सहित कई बार तहसील और जिला प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने प्रशासन से भूमि को तत्काल कब्जामुक्त कराते हुए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित का यह भी आरोप है कि आराजी संख्या 230 की रजिस्ट्री कराकर उनकी आराजी संख्या 231 पर कब्जा करा दिया गया। उन्होंने संबंधित लोगों के नाम भी शिकायत में दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।

इधर, सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें रामसरखा तिवारी एक माह के भीतर न्याय न मिलने पर आत्मदाह करने की चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं।प्रश्न यह भी उठ रहा है कि यदि एक बुजुर्ग व्यक्ति वर्षों से शिकायतें करने, राजस्व रिपोर्ट और मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अपनी भूमि पर कब्जा नहीं दिला पा रहा है, तो आम नागरिक को समय पर न्याय कैसे मिलेगा?

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