कोरांव क्षेत्र में चार अवैध घाटों से दिन-रात हो रहा बालू खनन, ग्रामीणों में आक्रोश
यमुनापार, प्रयागराज।कोरांव क्षेत्र में इन दिनों अवैध बालू खनन का कारोबार चरम पर पहुंच गया है। नदी का सीना चीरकर बालू माफिया खुलेआम खनन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन मौन बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध खनन के कारण जहां एक ओर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नदियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार बड़ोखर चौकी अंतर्गत लगभग चार प्रमुख घाटों पर अवैध तरीके से बालू निकासी की जा रही है। इन घाटों पर दिन-रात नावों और ट्रैक्टर-ट्रालियों के जरिए बालू ढुलाई का कार्य चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा कारोबार सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा है और इसके पीछे प्रभावशाली लोगों का हाथ होने की चर्चा है।
सबसे चर्चित घाट बांस घाट बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां से मोटी और महीन दोनों प्रकार की उच्च गुणवत्ता वाली बालू निकाली जा रही है। नदी के बीचोंबीच नाव लगाकर मजदूरों के माध्यम से बालू निकाली जाती है, जिसे निर्धारित स्थान पर इकट्ठा कर ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर विभिन्न गांवों और बाजारों में भेजा जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि घाट पर आम लोगों की आवाजाही लगभग प्रतिबंधित कर दी गई है। यदि कोई व्यक्ति वहां पहुंचने या तस्वीर लेने की कोशिश करता है तो कथित तौर पर माफियाओं के गुर्गे उसे धमकाकर भगा देते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि घाट के संचालन और देखरेख के लिए कुछ स्थानीय लोगों को लगाया गया है, जो पूरे कारोबार की निगरानी करते हैं। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि अवैध खनन करने वाले लोग प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए मोटी रकम खर्च करते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूसरा प्रमुख घाट भगतपुर घाट बताया जा रहा है, जहां से भी बड़े पैमाने पर बालू निकासी की जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक यहां से ट्रैक्टर-ट्रालियों के माध्यम से गांव-गांव बालू पहुंचाई जा रही है। इतना ही नहीं, कई दुकानों और निजी स्थानों पर बालू का भंडारण कर खुलेआम बिक्री भी की जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।
तीसरा घाट खिवली में संचालित होने की बात सामने आ रही है। यहां कई ट्रैक्टर-ट्रालियां लगातार बालू ढुलाई में लगी रहती हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय यह कारोबार और अधिक तेज हो जाता है, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
वहीं चौथा घाट टुडियार क्षेत्र में बताया जा रहा है, जहां कई लोग मिलकर नावों के जरिए नदी से बालू निकाल रहे हैं। लगातार हो रहे खनन से नदी की धारा और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में नदी का स्वरूप ही बदल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध बालू खनन केवल राजस्व की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा है। अनियंत्रित खनन से नदी की गहराई बढ़ती है, किनारों का कटाव तेज होता है तथा जलस्तर प्रभावित होता है। इससे खेती, पेयजल और आसपास के गांवों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और खनन विभाग से अविलंब कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस और प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करें तो एक भी ट्रैक्टर अवैध बालू लेकर नहीं निकल सकता। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है।





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